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Monday, 28 November 2022

लक्ष्मणजी बोले आप मुझे इस धर्म संकट में मत डालिए।*

 

*💥आचरण ही सर्वश्रेष्ठ💥* 


     *बात उन दिनों की है जब भगवान श्रीराम अपने 14 वर्षों के वनवास के दौरान चित्रकूट में थे। भगवान राम एवं माता सीता कुटिया के बाहर बैठे हुए थे।*


   *लक्ष्मणजी उनके चरणों में बैठे थे। तभी श्रीराम ने कहा कि लक्ष्मण यहां आओ मेरे और सीता के बीच एक विवाद हो गया है। इसलिए तुम न्याय करो।*


   *लक्ष्मण जी मान गए। तब श्रीराम-' मैं कहता हूं कि मेरे चरण सुंदर हैं। सीता कहती हैं उनके चरण सुंदर हैं। तुम दोनों के चरणों की पूजा करते हो। अब तुम ही फैसला करो कि किसके चरण सुंदर हैं।*


*लक्ष्मणजी बोले आप मुझे इस धर्म संकट में मत डालिए।*


   *तब श्रीराम ने समझाया कि तुम बैरागी हो। निर्भय होकर कहो। किसके चरण सुंदर हैं। राम के चरणों को दिखाते हुए लक्ष्मणजी बोले कि माता, इन चरणों से आपके चरण सुंदर हैं।*


*इतना कहते हुए लक्ष्मण जी चुप हो गए और माता सीता खुश।*


   *इस पर लक्ष्मण जी बोले माता अधिक खुश मत होना। भगवान राम के चरण हैं, तभी आपके चरणों की कीमत है। इनके चरण न हों तो आपके चरण सुंदर नहीं लग सकते।*


*अब रामजी खुश हो गए। तब लक्ष्मणजी फिर बोले कि आप दोनों को खुश होने की जरूरत नहीं।*


*आप दोनों के चरणों के अलावा भी एक चरण हैं जिसके कारण ही आपके चरणों की पूजा होती है यानी आचरण।*


*आचरण की ही कीमत होती है महाराज ! आपके चरण सुंदर हैं तो उसका कारण आपका महान आचरण है।*

  

*व्यक्ति के आचरण अच्छे हों तो उसका तन और मन दोनों ही सुंदर होता है और वह संसार में अपने नाम की अमिट छाप छोड़ जाता है।*

आपका दिन मंगलमय हो 🙏🙏

राधे राधे जय श्री राधे 🙏🙏

जय माता दी जय माता दी👏👏

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