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Friday, 24 April 2020

वीरभद्र साधना


साधना आप किसी भी रविवार या अमावस्या की रात्रि ११ के बाद आरम्भ कर सकते है.आपका मुख दक्षिण की और हो.अपने सामने बाजोट पर लाल वस्त्र बिछाकर उस पर शिवलिंग स्थापित करे.वीरभद्र शिव का ही रौद्र रूप है अतः आपको किसी अन्य विग्रह आदि की आवश्यकता नहीं है.आपके आसन वस्त्र लाल होना आवश्यक है। भगवान  शिव का सामान्य पूजन करे.तील के तेल का दीपक लगाये।तथा भोग में कोई भी मिठाई अर्पण करे.भगवान  शिव के समक्ष प्रार्थना करे वे वीरभद्र रूप धारण कर हमारे जीवन से शत्रु का नाश करे तथा उसे पराजित करे.इसके बाद वीरभद्र मंत्र की २१ माला जाप रुद्राक्ष माला से करे.मंत्र में जहा अमुक आया है वहा  शत्रु का नाम ले। जाप के बाद पूर्ण ह्रदय से प्रार्थना करे तथा प्रसाद स्वयं ग्रहण करे.यह क्रम तीन दिनों तक अवश्य करे.अंतिम दिन अग्नि प्रज्वलित कर घी तथा काली  मिर्च को मिलाकर  १०८ आहुति प्रदान करे.बाद में यज्ञ की भस्म को जल प्रवाह कर दे,थोड़ी सी भस्म संभाल  कर रख ले,और शत्रु के द्वार पर मंत्र पड़कर भस्म फेक आये.अगर ये संभव न हो तो उसके घर की और मुख करके भस्म फुक मारकर मंत्र पडत हुए उड़ा  दे.इस प्रकार ये साधना पूर्ण होती है,तथा साधक को शत्रु से मुक्ति प्रदान कर सुखी करती है.

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