Breaking

Post Top Ad

Your Ad Spot

Saturday, 5 October 2019

Dattatreya । Ganagapur Temple


मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी पर देशभर में दत्त जयंती का उत्सव मनाया जाता है।
ऐसे में इस धार्मिक स्थल का महत्व और बढ़ जाता है। यहां पर भगवान दत्तात्रेय का जागृत क्षेत्र है। भगवान दत्तात्रेय जिनमें तीनों शक्तियां जिसे ब्रह्मा, विष्णु और महेश समाई हुई हैं उनका जागृत स्थल गाणगापुर को माना जाता है। गुलबर्गा जिले में गाणगापुर में श्री दत्तात्रेय का यह स्थल है।
यहां भगवान दत्तात्रेय का यह स्थल महाराष्ट्र राज्य के औरंगाबाद अहमदनगर हाईवे पर आता है। यहां पर भगवान दत्तात्रेय की एकमुखी मूर्ति, भगवान नृसिंह मंदिर आदि हैं। यहां पर आने वाले श्रद्धालु भगवान दत्त की पादुका का पूजन भी प्रमुख तौर पर करते हैं। मंदिर में हर समय दिंबरा दिगंबरा श्री पाद वल्लभ दिगंबरा के बोल गूंजते हैं। मान्यता है कि यहीं पर भगवान दत्तात्रेय ने अवतार लिया था। यहां आने वालों को भगवान दत्तात्रेय की जागृत अनुभूति यहां पर होती है।
 देवास से 10 किमी दूर गांव बांगर में स्थित आस्था और विश्वास के इस जागृत स्थल पर हर गुरुवार हजारों की संख्या में दूरदराज से आकर श्रद्धालु भक्तजन हाजिरी लगाते हैं, जिनमें युवाओं की संख्या अधिक होती है।

बेलगाम (कर्नाटक) निवासी ब्रह्मचारी केशव
गुरुनाथ कुलकर्णी श्री दत्त के अनन्य भक्त थे,
 जिन्हें लोग काका महाराज कहते थे।
गाणगापुर से, जो भगवान श्री दत्त का मुख्य
स्थान है, आदेश हुआ कि 'मेरी पादुका लेकर
 मालवा जाइए और इनकी स्थापना उस स्थान
पर करें जो देवी के शक्तिपीठ और ज्योतिर्लिंग
के मध्य हो। इस स्थान के सामने श्मशान हो।
 वह भूमि सती की हो और उस जगह जल
 का अस्तित्व हो।'
आदेश के मुताबिक काका महाराज उस
स्थान की खोज में निकल पड़े और बांगर
के रूप में उन्हें वह सही स्थान मिला जहां
 आज श्री दत्त पादुका मंदिर स्थापित है,
जिनकी स्थापना 10 जुलाई 1975
(आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा) गुरुवार को की गई।
 धीरे-धीरे देवस्थान जागृत हुआ और
 मनोकामना पूर्ण करने वाले सिद्ध स्थान
 के रूप में पहचाना जाने लगा।
इस स्थान पर श्री दत्त प्रतिमा की स्थापना
 श्री भय्यू महाराज द्वारा की गई है।
प्रत्यक्ष देव गाणगापूरात आहेत म्हणून
 येथे आलेल्या भक्तांना संकटातून तारण्याचे
 कार्य गेली अनेक वर्ष दत्त महाराज
करीत आहेत. येथे देव आहेत व येथेच
 थांबले आहेत.
कोणीही श्रद्धेने या व कृपाशिर्वाद प्राप्त
करुन घ्या असा महाराजांचा संदेश आहे.
याच गावात राहून दररोजचे स्नान
भीमा-अमरजा संगमावर करुन दुपारच्या
 वेळेस निर्गुण मठात भिक्षेसाठी गुप्तरुपाने
 कोणत्याही वेषात उपस्थित असतो असे
महाराज सांगतात. अज्ञानामुळे शेजारी
असूनसुद्धा श्री गुरुंना आपण ओळखू
 शकत नाही. नामस्मरणात तल्लीन
झाल्यावर व विश्र्वास ठेवला तर देव
दर्शन देतातच अशी भक्तांची श्रद्धा आहे.
चराचरात देव वसला आहे अशी चर्चा व
 समज आहे. परंतू गाणगापूरला प्रत्यक्ष
 देव आहे. हे सिद्ध गुरुचरित्र ग्रंथातून सांगतात.
त्यांच्या कृपेचा साक्षात्कार अज्ञानी भक्त
 करुन घेत नाहीत. ‘नित्य जे जन गायन करिती ।
 त्यावर माझी अतिप्रीती’ माझे नामस्मरण
 करणारे भक्त मला आवडतात हे श्रीगुरुदत्तांनी
 सांगितले आहे.

No comments:

Post a Comment

Post Top Ad

Your Ad Spot